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श्लोक  14.15.26 
न हि तस्याप्रियं कुर्यां प्राणत्यागेऽप्युपस्थिते।
कुतो गन्तुं महाबाहो पुरीं द्वारावतीं प्रति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! यदि मेरे प्राण भी संकट में हों, तो भी मैं धर्मराज को अप्रसन्न नहीं कर सकता; फिर द्वारका जाकर उनकी भावनाओं को कैसे ठेस पहुँचा सकता हूँ?
 
Mahabaho! Even if my life is in danger, I cannot displease Dharamraj; then how can I hurt his feelings for going to Dwaraka?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)