श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  14.15.24 
धर्मपुत्रे हि धर्मज्ञे कृतज्ञे सत्यवादिनि।
सत्यं धर्मो मतिश्चाग्रॺा स्थितिश्च सततं स्थिरा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर धर्म के ज्ञाता, कृतज्ञ और सत्यनिष्ठ हैं। सत्य, धर्म, सद्बुद्धि और उच्च पद जैसे गुण उनमें सदैव स्थिर रहते हैं॥ 24॥
 
Dharmaputra King Yudhishthira is knowledgeable about Dharma, grateful and truthful. Qualities like truth, Dharma, good intellect and high status always remain stable in him.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)