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mahabharat 14.15.18: जहाँ मेरे दत्तक पुत्र राजा युधिष्ठिर, पराक्रमी भीमसेन तथा माद्री के पुत्र नकुल और सहदेव उपस्थित हों, वहाँ मैं परम आनंद प्राप्त कर सकता हूँ॥ 18॥   |   mahabharat अध्याय 14.15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  14.15.18 
यत्र धर्मसुतो राजा यत्र भीमो महाबल:।
यत्र माद्रवतीपुत्रौ रतिस्तत्र परा मम॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जहाँ मेरे दत्तक पुत्र राजा युधिष्ठिर, पराक्रमी भीमसेन तथा माद्री के पुत्र नकुल और सहदेव उपस्थित हों, वहाँ मैं परम आनंद प्राप्त कर सकता हूँ॥ 18॥
 
Where my adopted son King Yudhishthira, the mighty Bhimasena and the sons of Madri, Nakula and Sahadeva are present, there I can attain supreme bliss.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)