श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  14.15.13 
असपत्नां महीं भुङ्‍क्ते धर्मराजो युधिष्ठिर:।
भीमसेनानुभावेन यमयोश्च नरोत्तम॥ १३॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! भीमसेन और नकुल-सहदेव के प्रभाव से धर्मराज युधिष्ठिर इस पृथ्वी पर अबाधित शासन का आनंद ले रहे हैं। 13॥
 
Narashrestha! Due to the influence of Bhimsen and Nakul-Sahadeva, Dharmaraja Yudhishthir is enjoying the uninterrupted rule of this earth. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)