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mahabharat 14.12.10: जटासुर के हाथों जो कष्ट तुम्हें सहने पड़े, चित्रसेन के साथ जो युद्ध हुआ, तथा सिन्धुराज जयद्रथ के हाथों जो अपमान और कष्ट तुम्हें सहना पड़ा, उन सबका स्मरण तुम नहीं करना चाहते॥10॥   |   mahabharat अध्याय 14.12: भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको मनपर विजय करनेके लिये आदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 12: भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको मनपर विजय करनेके लिये आदेश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  14.12.10 
जटासुरात् परिक्लेशश्चित्रसेनेन चाहव:।
सैन्धवाच्च परिक्लेशो न तस्य स्मर्तुमिच्छसि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जटासुर के हाथों जो कष्ट तुम्हें सहने पड़े, चित्रसेन के साथ जो युद्ध हुआ, तथा सिन्धुराज जयद्रथ के हाथों जो अपमान और कष्ट तुम्हें सहना पड़ा, उन सबका स्मरण तुम नहीं करना चाहते॥10॥
 
You do not wish to recall the sufferings you had to endure at the hands of Jatasura, the fight with Chitrasena, and the humiliation and suffering you had to endure at the hands of Sindhuraj Jayadratha.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)