Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.113.d9: मैं तीनों लोकों में निश्चिन्त हूँ। दिन हो या रात, मुझे किसी का भय नहीं रहता; किन्तु जब कोई शूद्र अपनी मर्यादा का उल्लंघन करता है, तो मुझे बहुत दुःख होता है। | mahabharat अध्याय 14.113: भगवान् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्रैलोक्येऽस्मिन् निरुद्विग्नो न बिभेमि कुतश्चन।
न दिवा यदि वा रात्रावुद्वेग: शूद्रलङ्घनात्॥
अनुवाद
मैं तीनों लोकों में निश्चिन्त हूँ। दिन हो या रात, मुझे किसी का भय नहीं रहता; किन्तु जब कोई शूद्र अपनी मर्यादा का उल्लंघन करता है, तो मुझे बहुत दुःख होता है।
I am free from anxiety in all the three worlds. Be it day or night, I am never afraid of anyone; but I feel bad when a Shudra violates his decorum.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥