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mahabharat 14.113.d44: यह सुनकर पाण्डव दुःखी हो गये। उन्होंने हाथ जोड़कर सिर पर रख लिये और अश्रुपूर्ण नेत्रों से परमपिता परमेश्वर श्री कृष्ण की ओर देखने लगे, किन्तु अत्यन्त दुःखी होने के कारण वे उस समय कुछ भी न कह सके।   |   mahabharat अध्याय 14.113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.113.d44 
ततो विषण्णवदना: पाण्डवा: पुरुषोत्तमम्।
अञ्जलिं मूर्ध्नि संधाय नेत्रैरश्रुपरिप्लुतै:।
पिबन्त: सततं कृष्णं नोचुरार्ततरास्तदा॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर पाण्डव दुःखी हो गये। उन्होंने हाथ जोड़कर सिर पर रख लिये और अश्रुपूर्ण नेत्रों से परमपिता परमेश्वर श्री कृष्ण की ओर देखने लगे, किन्तु अत्यन्त दुःखी होने के कारण वे उस समय कुछ भी न कह सके।
 
Hearing this, the Pandavas became sad. They folded their hands and put them on their heads and started staring at the Supreme Lord Shri Krishna with tearful eyes, but being very sad, they could not say anything at that time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)