Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.113.d43: राजन! उन सबके चले जाने पर केशिनीषुदन भगवान श्रीकृष्ण ने सात्यकि सहित दारुक का स्मरण किया। सारथी दारुक पास ही बैठा था, उसने निवेदन किया - 'प्रभु! रथ तैयार है, कृपया पधारें।' | mahabharat अध्याय 14.113: भगवान् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गतेषु तेषु सर्वेषु केशव: केशिहा हरि:।
सस्मार दारुकं राजन् स च सात्यकिना सह।
समीपस्थोऽभवत् सूतो याहि देवेति चाब्रवीत्॥
अनुवाद
राजन! उन सबके चले जाने पर केशिनीषुदन भगवान श्रीकृष्ण ने सात्यकि सहित दारुक का स्मरण किया। सारथी दारुक पास ही बैठा था, उसने निवेदन किया - 'प्रभु! रथ तैयार है, कृपया पधारें।'
King! After all of them left, Lord Krishna, the Keshinishudan, remembered Daruk along with Satyaki. Charioteer Daruk was sitting nearby, he requested - 'Lord! The chariot is ready, please come.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥