vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 113: भगवान् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन
»
श्लोक d41
श्लोक
14.113.d41
प्रणम्य शिरसा विष्णुं प्रतिनन्द्य च ता: कथा:॥
अनुवाद
तब सबने भगवान के चरणों में सिर झुकाया और उनकी शिक्षाओं की प्रशंसा की।
Then all of them bowed their heads at the feet of the Lord and praised his teachings.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×