श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन  »  श्लोक d29
 
 
श्लोक  14.113.d29 
ब्रह्मा मामाश्रितो राजन् नाहं कंचिदुपाश्रित:।
ममाश्रयो न कश्चित् तु सर्वेषामाश्रयो ह्यहम्॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी मेरे संरक्षण में रहते हैं, लेकिन मैं किसी पर निर्भर नहीं हूँ। हे राजन! कोई मेरा आधार नहीं है। मैं ही सबका आधार हूँ।
 
Brahmaji lives under my protection, but I am not dependent on anyone. O King! No one is my support. I am the support of everyone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)