vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 113: भगवान् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन
»
श्लोक d27
श्लोक
14.113.d27
वेदाधीना: सदा यज्ञा यज्ञाधीनास्तु देवता:।
देवता: ब्राह्मणाधीनास्तस्माद् विप्रास्तु देवता:॥
अनुवाद
यज्ञ सदैव वेदों के अधीन हैं और देवता यज्ञों तथा ब्राह्मणों के अधीन हैं, इसलिए ब्राह्मण देवता हैं।
Yagyas are always subject to the Vedas and the gods are subject to the yagyas and the Brahmins, hence the Brahmins are gods.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×