श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन  »  श्लोक d23
 
 
श्लोक  14.113.d23 
बहुवर्षसहस्राणि तपस्तपति यो नर:।
नासौ पदमवाप्नोति मद्भक्तैर्यदवाप्यते॥
 
 
अनुवाद
हजारों वर्षों तक तपस्या करने वाला व्यक्ति भी उस पद को प्राप्त नहीं कर सकता, जो मेरे भक्तों को आसानी से प्राप्त हो जाता है।
 
Even a person who performs penance for thousands of years cannot attain that position which is easily attained by my devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)