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mahabharat 14.113.d22: फिर जो मेरे प्रत्यक्ष भक्त हैं, जिनका जीवन मुझे समर्पित है और जो सदैव मेरे नाम और गुणों का कीर्तन करते रहते हैं, यदि वे देवी लक्ष्मी के साथ मेरी भी विधिपूर्वक पूजा करें, तो उनकी मुक्ति के विषय में क्या कहा जा सकता है?   |   mahabharat अध्याय 14.113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.113.d22 
किं पुनर्ये यजन्ते मां सदारं विधिपूर्वकम्।
मद्भक्ता मद्‍गतप्राणा: कथयन्तश्च मां सदा॥
 
 
अनुवाद
फिर जो मेरे प्रत्यक्ष भक्त हैं, जिनका जीवन मुझे समर्पित है और जो सदैव मेरे नाम और गुणों का कीर्तन करते रहते हैं, यदि वे देवी लक्ष्मी के साथ मेरी भी विधिपूर्वक पूजा करें, तो उनकी मुक्ति के विषय में क्या कहा जा सकता है?
 
Then those who are my direct devotees, whose life is devoted to me and who always keep chanting my name and qualities, if they worship me along with Goddess Lakshmi in a proper manner, then what can be said about their salvation?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)