श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन  »  श्लोक d19
 
 
श्लोक  14.113.d19 
स्थावरे जङ्गमे वापि सर्वभूतेषु पाण्डव।
समत्वेन यदा कुर्यान्मद्भक्तो मित्रशत्रुषु॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! जब मनुष्य समस्त चराचर प्राणियों में तथा मित्र और शत्रु में समता देखता है, तब वह मेरा सच्चा भक्त है।
 
Pandunandan! When a man sees equality in all living and movable beings and in friend and foe, then he is my true devotee.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)