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mahabharat 14.113.d15: यदि कोई शूद्र मुझे श्रद्धापूर्वक एक पत्ता, एक फूल, एक फल या जल भी अर्पित करता है, तो मैं उसका दान आदरपूर्वक स्वीकार कर लेता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 14.113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.113.d15 
पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
तदहं भक्त्युपहृतं मूर्ध्ना गृह्णामि शूद्रत:॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई शूद्र मुझे श्रद्धापूर्वक एक पत्ता, एक फूल, एक फल या जल भी अर्पित करता है, तो मैं उसका दान आदरपूर्वक स्वीकार कर लेता हूँ।
 
Even if a Sudra offers me a leaf, a flower, a fruit or water with devotion, I respectfully accept his gift.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)