श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 113: भगवान‍् के उपदेशका उपसंहार और द्वारकागमन  »  श्लोक d13
 
 
श्लोक  14.113.d13 
द्विजशुश्रूषया शूद्र: परं श्रेयोऽधिगच्छति।
द्विजशुश्रूषणादन्यन्नास्ति शूद्रस्य निष्कृति:॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों की सेवा करने से ही शूद्रों को परम कल्याण की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त उनकी मुक्ति का कोई अन्य उपाय नहीं है।
 
It is only by serving the Brahmins that the Shudras attain supreme welfare. Apart from this, there is no other means for their salvation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)