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mahabharat 14.112.d9: जो ब्राह्मण अग्निहोत्र करना छोड़ देता है और व्यापार करने लगता है, वह वर्णसंकरता को बढ़ावा देने वाला माना जाता है और शूद्र के बराबर होता है।   |   mahabharat अध्याय 14.112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.112.d9 
अग्निहोत्रपरिभ्रष्ट: प्रसक्त: क्रयविक्रयै:।
वर्णसंकरकर्ता च ब्राह्मणो वृषलै: सम:॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण अग्निहोत्र करना छोड़ देता है और व्यापार करने लगता है, वह वर्णसंकरता को बढ़ावा देने वाला माना जाता है और शूद्र के बराबर होता है।
 
A Brahmin who has given up performing Agnihotra and has taken up business is considered to be one who promotes hybridity and is equal to a Shudra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)