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श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  14.112.d8 
पञ्चस्वेतेषु शौचेषु हृदि शौचं विशिष्यते।
हृदयस्य च शौचेन स्वर्गं गच्छन्ति मानवा:॥
 
 
अनुवाद
इन पाँच पवित्रताओं में हृदय की पवित्रता सबसे बड़ी है। हृदय की पवित्रता से ही मनुष्य स्वर्ग जाता है।
 
Of these five purities, purity of heart is the greatest. It is only by the purity of heart that a person goes to heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)