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mahabharat 14.112.d6: देवता उन्हीं पुरुषों को ब्राह्मण मानते हैं जो अग्निहोत्र, व्रत और स्वाध्याय में तत्पर रहते हैं, पवित्र हैं, व्रत का पालन करते हैं और जिनकी इन्द्रियाँ वश में हैं। हे राजन! केवल जाति के आधार पर किसी की पूजा नहीं होती, केवल अच्छे गुणों से ही कल्याण होता है।   |   mahabharat अध्याय 14.112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.112.d6 
अग्निहोत्रव्रतपरान् स्वाध्यायनिरतान् शुचीन्।
उपवासरतान् दान्तांस्तान् देवा ब्राह्मणा विदु:॥
न जात्या पूजितो राजन् गुणा: कल्याणकारणा:।
 
 
अनुवाद
देवता उन्हीं पुरुषों को ब्राह्मण मानते हैं जो अग्निहोत्र, व्रत और स्वाध्याय में तत्पर रहते हैं, पवित्र हैं, व्रत का पालन करते हैं और जिनकी इन्द्रियाँ वश में हैं। हे राजन! केवल जाति के आधार पर किसी की पूजा नहीं होती, केवल अच्छे गुणों से ही कल्याण होता है।
 
The gods consider only those men as Brahmins who are devoted to Agnihotra, fasting and self-study, are pure, observe fasts and have controlled senses. O King! One is not worshipped merely on the basis of caste, only good qualities bring welfare.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)