Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.112.d24: जो ब्राह्मण वेदविहित रीति से समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित मुझ परमेश्वर की पूजा करते हैं, वे मेरे सायुज्य को प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा  »  श्लोक d24
 
 
श्लोक  14.112.d24 
वेदोक्तेनैव मार्गेण सर्वभूतहृदि स्थितम्।
मामर्चयन्ति ये विप्रा मत्सायुज्यं व्रजन्ति ते॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण वेदविहित रीति से समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित मुझ परमेश्वर की पूजा करते हैं, वे मेरे सायुज्य को प्राप्त होते हैं।
 
Those Brahmins who worship me, the Supreme Lord, who is present in the hearts of all the living beings, in the manner prescribed by the Vedas, attain my Sayujya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)