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mahabharat 14.112.d23: यदि मेरा भक्त, शूद्र भी मुझे पत्ता, फूल, फल या जल अर्पित करता है, तो मैं उसे अपने सिर पर स्वीकार करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 14.112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा  »  श्लोक d23
 
 
श्लोक  14.112.d23 
पत्रं वाप्यथवा पुष्पं फलं वाप्यप एव वा।
ददाति मम शूद्रो यच्छिरसा धारयामि तत्॥
 
 
अनुवाद
यदि मेरा भक्त, शूद्र भी मुझे पत्ता, फूल, फल या जल अर्पित करता है, तो मैं उसे अपने सिर पर स्वीकार करता हूँ।
 
Even if my devotee, a Shudra, offers a leaf, a flower, a fruit or even water, I accept it on my head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)