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mahabharat 14.112.d21: मेरे भक्तों के भक्तजनों पर मेरा विशेष प्रेम है, इसलिए मेरे भक्तों के भक्तों को विशेष सम्मान दिया जाना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 14.112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.112.d21 
मम भक्तस्य भक्तेषु प्रीतिरभ्यधिका मम।
तस्मान्मद्भक्तभक्ताश्च पूूजनीया विशेषत:॥
 
 
अनुवाद
मेरे भक्तों के भक्तजनों पर मेरा विशेष प्रेम है, इसलिए मेरे भक्तों के भक्तों को विशेष सम्मान दिया जाना चाहिए।
 
I have special love for those people who are devotees of my devotees, hence the devotees of my devotee should be given special respect.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)