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mahabharat 14.112.d20: अतः चाण्डाल भी मेरा भक्त हो तो भी बुद्धिमान पुरुष को उसका अपमान नहीं करना चाहिए। उसका अपमान करने से मनुष्य को रौरव नरक में गिरना पड़ता है।   |   mahabharat अध्याय 14.112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा  »  श्लोक d20
 
 
श्लोक  14.112.d20 
चण्डालमपि मद्भक्तं नावमन्येत बुद्धिमान्।
अवमानात् पतन्त्येव नरके रौरवे नरा:॥
 
 
अनुवाद
अतः चाण्डाल भी मेरा भक्त हो तो भी बुद्धिमान पुरुष को उसका अपमान नहीं करना चाहिए। उसका अपमान करने से मनुष्य को रौरव नरक में गिरना पड़ता है।
 
Therefore, even if a Chandala is my devotee, a wise man should not insult him. By insulting him, a man has to fall into the hell of Raurava.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)