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mahabharat 14.112.d2: श्री भगवान बोले - हे पाण्डुपुत्र! मैं तुम्हें एक-एक करके बताता हूँ कि ब्राह्मणों के कर्म क्यों सफल होते हैं और क्यों निष्फल। सुनो।   |   mahabharat अध्याय 14.112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.112.d2 
श्रीभगवानुवाच
शृणु पाण्डव तत् सर्वं ब्राह्मणानां यथाक्रमम्।
सफलं निष्फलं चैव तेषां कर्म ब्रवीमि ते॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - हे पाण्डुपुत्र! मैं तुम्हें एक-एक करके बताता हूँ कि ब्राह्मणों के कर्म क्यों सफल होते हैं और क्यों निष्फल। सुनो।
 
Sri Bhagavan said - O son of Pandu! I will tell you one by one why the deeds of Brahmins are successful and why they are fruitless. Listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)