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mahabharat 14.112.d13: जैसे कुत्ते की खाल में रखा हुआ दूध और कुत्ते द्वारा चाटा हुआ नैवेद्य अशुद्ध हो जाता है, वैसे ही बैल जैसे मनुष्य की बुद्धि में रखे हुए वेद भी अशुद्ध हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा  »  श्लोक d13
 
 
श्लोक  14.112.d13 
श्वदृतौ तु यथा क्षीरं ब्रह्म वै वृषले तथा।
दुष्टतामेति तत् सर्वं शुना लीढं हविर्यथा॥
 
 
अनुवाद
जैसे कुत्ते की खाल में रखा हुआ दूध और कुत्ते द्वारा चाटा हुआ नैवेद्य अशुद्ध हो जाता है, वैसे ही बैल जैसे मनुष्य की बुद्धि में रखे हुए वेद भी अशुद्ध हो जाते हैं।
 
Just as milk kept in a dog's skin and offerings licked by a dog are impure, so too the Vedas kept in the intellect of a bull-like man become impure.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)