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mahabharat 14.112.d12: जो पापी मनुष्य ब्रह्मगीता आदि के द्वारा मेरी स्तुति न करके शूद्र की स्तुति करता है, वह चाण्डाल के समान है।   |   mahabharat अध्याय 14.112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा  »  श्लोक d12
 
 
श्लोक  14.112.d12 
स्तुतिभिर्ब्रह्मगीताभिर्य: शूद्रं स्तौति मानव:।
न तु मां स्तौति पापात्मा स तु चण्डालत: सम:॥
 
 
अनुवाद
जो पापी मनुष्य ब्रह्मगीता आदि के द्वारा मेरी स्तुति न करके शूद्र की स्तुति करता है, वह चाण्डाल के समान है।
 
The sinful person who instead of praising me through Brahmagita etc. praises a Shudra, is like a Chandala.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)