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mahabharat 14.112.d10: हे कुन्तीपुत्र! जो वेदशास्त्रों को भूलकर खेत जोतता है, वह ब्राह्मण जो अपने वर्ण के विरुद्ध आचरण करता है, वह वृषल माना जाता है।   |   mahabharat अध्याय 14.112: उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ और पीपलकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.112.d10 
यस्य वेदश्रुतिर्नष्टा कर्षकश्चापि यो द्विज:।
विकर्मसेवी कौन्तेय स वै वृषल उच्यते॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! जो वेदशास्त्रों को भूलकर खेत जोतता है, वह ब्राह्मण जो अपने वर्ण के विरुद्ध आचरण करता है, वह वृषल माना जाता है।
 
Kunti's son! One who has forgotten the Vedic scriptures and ploughs the field, that Brahmin who acts against his Varna is considered to be a Vrishal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)