पात्रं च ब्रह्मकूर्चं च शृणु तत्र च भारत।
पलाशं पद्मपत्रं च ताम्रं वाथ हिरण्मयम्।
सादयित्वा तु गृह्णीयात् तत् तु पात्रमुदाहृतम्॥
अनुवाद
भरतनंदन! अब मैं ब्रह्मकुच और उसके पात्र का वर्णन करूँगा, सुनो। ब्रह्मकुच को पलाश या कमल के पत्ते में अथवा ताँबे या सोने के पात्र में रखकर पीना चाहिए। ये ही उसके उपयुक्त पात्र कहे गए हैं।
Bharatanandan! Now I will describe Brahmakuch and its vessel, listen. Brahmakuch should be drunk by placing it in a leaf of Palaash or lotus or in a vessel made of copper or gold. These are said to be its suitable vessels.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)