Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.111.d47-d48: यदि कोई व्यक्ति सूर्यग्रहण के समय पूर्व दिशा में बहने वाली नदी के तट पर जाकर मेरे मंदिर के पास दक्षिणावर्त शंख के जल से अथवा कपिला गाय के सींगों से स्पर्श किए हुए जल से स्नान करता है, तो उसके सभी संचित पाप तुरंत नष्ट हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d47-d48
 
 
श्लोक  14.111.d47-d48 
दक्षिणावर्तशङ्खाद् वा कपिलाशृङ्गतोऽपि वा।
प्राक्स्रोतसं नदीं गत्वा ममायतनसंनिधौ॥
सलिलेन तु य: स्नायात् सकृदेव रविग्रहे।
तस्य यत् संचितं पापं तत्क्षणादेव नश्यति॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई व्यक्ति सूर्यग्रहण के समय पूर्व दिशा में बहने वाली नदी के तट पर जाकर मेरे मंदिर के पास दक्षिणावर्त शंख के जल से अथवा कपिला गाय के सींगों से स्पर्श किए हुए जल से स्नान करता है, तो उसके सभी संचित पाप तुरंत नष्ट हो जाते हैं।
 
If, during a solar eclipse, a person goes to the bank of a river flowing in the east and takes a bath near my temple with the water of a Dakshinavarta conch or with water touched by the horns of a Kapila cow, all his accumulated sins are instantly destroyed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)