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mahabharat 14.111.d46: यदि कोई व्यक्ति वराह द्वारा खोदी गई मिट्टी को अपने सिर पर धारण करके 100 प्राणायाम करता है, तो वह अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d46
 
 
श्लोक  14.111.d46 
यत्र कृष्टां वराहस्य मृत्तिकां शिरसा वहन्।
प्राणायामशतं कृत्वा नर: पापै: प्रमुच्यते॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई व्यक्ति वराह द्वारा खोदी गई मिट्टी को अपने सिर पर धारण करके 100 प्राणायाम करता है, तो वह अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
 
If a person holds the clay dug out by Varaha on his head and performs 100 Pranayamas, he becomes free from all his sins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)