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mahabharat 14.111.d39: क्षमाशील मनुष्य स्वर्ग, यश और मोक्ष प्राप्त करता है; इसीलिए क्षमाशील मनुष्य को संत कहा जाता है।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d39
 
 
श्लोक  14.111.d39 
क्षमावान् प्राप्नुयात् स्वर्गं क्षमावानाप्नुयाद् यश:।
क्षमावान् प्राप्नुयान्मोक्षं तस्मात् साधु: स उच्यते॥
 
 
अनुवाद
क्षमाशील मनुष्य स्वर्ग, यश और मोक्ष प्राप्त करता है; इसीलिए क्षमाशील मनुष्य को संत कहा जाता है।
 
A forgiving person attains heaven, fame and salvation; That is why a forgiving man is called a saint.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)