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mahabharat 14.111.d34: ईश्वर का ज्ञान गुरु रूपी तीर्थ से प्राप्त होता है, अतः उससे बढ़कर कोई तीर्थ नहीं है। ज्ञानतीर्थ सर्वोत्तम तीर्थ है और ब्रह्मतीर्थ शाश्वत है।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d34
 
 
श्लोक  14.111.d34 
गुरुतीर्थं परं ज्ञानमतस्तीर्थं न विद्यते।
ज्ञानतीर्थं परं तीर्थं ब्रह्मतीर्थं सनातनम्॥
 
 
अनुवाद
ईश्वर का ज्ञान गुरु रूपी तीर्थ से प्राप्त होता है, अतः उससे बढ़कर कोई तीर्थ नहीं है। ज्ञानतीर्थ सर्वोत्तम तीर्थ है और ब्रह्मतीर्थ शाश्वत है।
 
Knowledge of God is obtained from a pilgrimage in the form of a Guru, hence there is no pilgrimage greater than that. Gyanatirtha is the best pilgrimage and Brahmatirtha is eternal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)