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mahabharat 14.111.d27: जो क्रोध में आकर पीपल के वृक्ष पर आक्रमण करता है, वह वास्तव में मुझ पर आक्रमण करता है। इसलिए सदैव पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करनी चाहिए और उसे काटना नहीं चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d27
 
 
श्लोक  14.111.d27 
यस्त्वेनं प्रहरेत् कोपान्मामेव प्रहरेत् तु स:।
तस्मात् प्रदक्षिणं कुर्यान्न छिन्द्यादेनमन्वहम्॥
 
 
अनुवाद
जो क्रोध में आकर पीपल के वृक्ष पर आक्रमण करता है, वह वास्तव में मुझ पर आक्रमण करता है। इसलिए सदैव पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करनी चाहिए और उसे काटना नहीं चाहिए।
 
One who attacks the Peepal tree in anger, actually attacks me. That is why one should always circumambulate the Peepal tree and should not cut it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)