Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.111.d26: महाराज! जहाँ मैं रहता हूँ, वहाँ पीपल का वृक्ष भी है। जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक पीपल वृक्ष की पूजा करता है, वह साक्षात् मेरी पूजा करता है।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d26
 
 
श्लोक  14.111.d26 
यत्राहं संस्थितो राजन्नश्वत्थश्चापि तिष्ठति।
यस्त्वेनमर्चयेद् भक्त्या स मां साक्षात् समर्चति॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जहाँ मैं रहता हूँ, वहाँ पीपल का वृक्ष भी है। जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक पीपल वृक्ष की पूजा करता है, वह साक्षात् मेरी पूजा करता है।
 
King! Wherever I live, there is a Peepal tree too. The person who worships the Peepal tree with devotion, worships me personally.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)