vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त
»
श्लोक d21
श्लोक
14.111.d21
युधिष्ठिर उवाच
भगवंस्तव गायत्री जप्यते च कथं विभो।
किं वा तस्य फलं देव ममाचक्ष्व सुरेश्वर॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, 'भगवन्! विभो! आपके गायत्री मंत्र का जप किस प्रकार होता है? हे देवराज! इसका फल क्या है - कृपया मुझे बताइए।'
Yudhishthira asked, 'Lord! Vibho! How is your Gayatri mantra chanted? O Lord of gods! What is its fruit - please tell me.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×