vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त
»
श्लोक d20
श्लोक
14.111.d20
ततश्चापि च्युत: कालादिह लोके युधिष्ठिर।
वेदवेदाङ्गविद् विप्र: कोटीधनपतिर्भवेत्॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! फिर समय आने पर वहाँ से लौटकर वह वेद-वेदांगों का विद्वान् और इस लोक में करोड़पति ब्राह्मण बनता है।
Yudhishthira! Then on returning from there in due course of time, he becomes a scholar of Vedas and Vedangas and a millionaire Brahmin in this world.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×