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mahabharat 14.111.d16: सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान श्रोत्रिय ब्राह्मणों को जो भी दान दिया जाता है, वह हजार गुना बढ़कर दाता को वापस मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d16
 
 
श्लोक  14.111.d16 
सूर्येन्दूपप्लवे चैव श्रोत्रियेभ्य: प्रदीयते।
तत्सहस्रगुणं भूत्वा दातारमुपतिष्ठति॥
 
 
अनुवाद
सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान श्रोत्रिय ब्राह्मणों को जो भी दान दिया जाता है, वह हजार गुना बढ़कर दाता को वापस मिलता है।
 
Whatever donation is given to Shrotri Brahmins during the solar and lunar eclipse, it returns to the donor multiplied a thousand times.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)