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mahabharat 14.111.d1: युधिष्ठिर ने पूछा - हे प्रभु! देवेश्वर! कृपया हमें यह बताइये कि विषुव में तथा सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण के समय दान करने से क्या फल प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 14.111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 111: विषुवयोग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  14.111.d1 
युधिष्ठिर उवाच
देव किं फलमाख्यातं विषुवेष्वमरेश्वर।
सूर्येन्दूपप्लवे चैव वक्तुमर्हसि तत् फलम्॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे प्रभु! देवेश्वर! कृपया हमें यह बताइये कि विषुव में तथा सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण के समय दान करने से क्या फल प्राप्त होता है।
 
Yudhishthir asked – Lord! Deveshwar! Please tell us what results are said to be obtained by donating in the equinox and at the time of solar eclipse and lunar eclipse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)