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mahabharat 14.110.d47: युधिष्ठिर ने पूछा, 'हे महाराज! कृष्णपक्ष की द्वादशी को आपका पूजन किस प्रकार किया जाना चाहिए? कृपया इस धर्ममय विषय का वर्णन कीजिए।'   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d47 
युधिष्ठिर उवाच
इदं च धर्मसम्पन्नं वक्तुमर्हसि मानद।
कृष्णपक्षेषु द्वादश्यामर्चनीय: कथं भवेत्॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, 'हे महाराज! कृष्णपक्ष की द्वादशी को आपका पूजन किस प्रकार किया जाना चाहिए? कृपया इस धर्ममय विषय का वर्णन कीजिए।'
 
Yudhishthira asked, 'O Honorable! How should you be worshipped on the Dwadashi of the dark fortnight? Please describe this righteous matter.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)