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श्लोक  14.110.d38 
चतुर्मूर्ते चतुर्बाहो चतुर्व्यूह नमो नम:।
लोकात्मँल्लोककृन्नाथ लोकावास नमो नम:॥
 
 
अनुवाद
आपके चार रूप, चार भुजाएँ और चतुर्भुज रूप हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ। आप ब्रह्माण्ड के स्वरूप, लोकों के स्वामी और समस्त लोकों के धाम हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ।
 
‘You have four forms, four arms and four-fold form. I salute you again and again. You are the form of the universe, the lord of the lords of the worlds and the abode of all the worlds. I salute you again and again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)