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mahabharat 14.110.d36: हृषीकेश! आप समस्त लोकों के स्वामी और देवों के भी देव हैं। आपको नमस्कार है। हे सहस्र नेत्रों वाले प्रभु! आपके सहस्र सिर हैं, मैं आपको सदैव नमस्कार करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d36 
सर्वलोकेश देवेश हृषीकेश नमोऽस्तु ते।
सहस्रशिरसे नित्यं सहस्राक्ष नमोऽस्तु ते॥
 
 
अनुवाद
हृषीकेश! आप समस्त लोकों के स्वामी और देवों के भी देव हैं। आपको नमस्कार है। हे सहस्र नेत्रों वाले प्रभु! आपके सहस्र सिर हैं, मैं आपको सदैव नमस्कार करता हूँ।
 
Hrishikesha! You are the Lord of all the worlds and the God of the Gods. Salutations to you. O Lord who has thousands of eyes! You have thousands of heads, I always salute you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)