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mahabharat 14.110.d32: हे राजन! इसमें कोई संदेह नहीं है कि जो मनुष्य द्वादशी तिथि को प्रेमपूर्वक मेरी और वेद संहिता की पूजा करता है, उसे उपर्युक्त फल प्राप्त होंगे।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d32 
अर्चयेत् प्रीतिमान् यो मां द्वादश्यां वेदसंहिताम्।
स पूर्वोक्तफलं राजँल्लभते नात्र संशय:॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इसमें कोई संदेह नहीं है कि जो मनुष्य द्वादशी तिथि को प्रेमपूर्वक मेरी और वेद संहिता की पूजा करता है, उसे उपर्युक्त फल प्राप्त होंगे।
 
O King! There is no doubt that a person who worships me and the Veda Samhita with love on the Dwadashi Tithi will receive the above mentioned fruits.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)