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mahabharat 14.110.d30: जब उपरोक्त विधि से प्रत्येक मास मेरी पूजा करते हुए एक वर्ष पूरा हो जाए, तो आलस्य त्यागकर अगले वर्ष भी पुनः मासिक पूजा आरम्भ कर दें।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d30 
मासे मासे समभ्यर्च्य क्रमशो मामतन्द्रित:।
पूर्णे संवत्सरे कुर्यात् पुन: संवत्सरं तु माम्॥
 
 
अनुवाद
जब उपरोक्त विधि से प्रत्येक मास मेरी पूजा करते हुए एक वर्ष पूरा हो जाए, तो आलस्य त्यागकर अगले वर्ष भी पुनः मासिक पूजा आरम्भ कर दें।
 
When one year is completed by worshipping me every month in the above manner, leaving aside laziness, then start the monthly worship again in the next year as well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)