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mahabharat 14.110.d25: नरेश्वर! जो मनुष्य भाद्रपद मास की द्वादशी तिथि को व्रत रखता है और 'हृषीकेश' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे सौत्रामणि यज्ञ का फल प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d25 
मासे भाद्रपदे यो मां हृषीकेशाख्यमर्चयेत्।
उपोष्य स समाप्नोति सौत्रामणिफलं नृप॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! जो मनुष्य भाद्रपद मास की द्वादशी तिथि को व्रत रखता है और 'हृषीकेश' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे सौत्रामणि यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
 
Nareshwar! One who fasts on the twelfth day of Bhadrapada month and worships me in the name of 'Hrishikesh', gets the results of Sautramani Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)