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mahabharat 14.110.d24: राजन! जो मनुष्य श्रावण मास की द्वादशी तिथि को व्रत करके 'श्रीधर' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे पंचयज्ञों का फल प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d24 
द्वादश्यां श्रावणे मासि श्रीधराख्यमुपोष्य माम्।
पूजयेद् य: समाप्नोति पञ्चयज्ञफलं नृप॥
 
 
अनुवाद
राजन! जो मनुष्य श्रावण मास की द्वादशी तिथि को व्रत करके 'श्रीधर' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे पंचयज्ञों का फल प्राप्त होता है।
 
Rajan! One who worships me in the name of 'Shridhar' by fasting on Dwadashi date in the month of Shravan, gets the results of Panchayagyas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)