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mahabharat 14.110.d23: हे भारतश्रेष्ठ! जो मनुष्य आषाढ़ मास की द्वादशी तिथि को व्रत करके 'वामन' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे नरमेध यज्ञ का फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d23 
आषाढे वामनाख्यं मां द्वादश्यां समुपोष्य य:।
नरमेधस्य स फलं प्राप्नोति भरतर्षभ॥
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! जो मनुष्य आषाढ़ मास की द्वादशी तिथि को व्रत करके 'वामन' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे नरमेध यज्ञ का फल मिलता है।
 
Bharatshrestha! The person who worships me by the name 'Vaman' by fasting on the twelfth day of Ashadh month, gets the results of Narmedha Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)