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mahabharat 14.110.d21: पाण्डुनन्दन! जो मनुष्य वैशाख मास की द्वादशी को व्रत रखता है और 'मधुसूदन' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d21 
द्वादश्यां मासि वैशाखे मधुसूदनसंज्ञितम्।
उपोष्य पूजयेद् यो मां सोऽग्निष्टोमस्य पाण्डव॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! जो मनुष्य वैशाख मास की द्वादशी को व्रत रखता है और 'मधुसूदन' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है।
 
Pandunandan! One who fasts on the 12th day of Vaishakh and worships me by the name 'Madhusudan' gets the results of Agnishtom Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)