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mahabharat 14.110.d20: जो मनुष्य चैत्र मास की द्वादशी तिथि को व्रत रखकर 'विष्णु' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे पुण्डरीक यज्ञ का फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d20 
द्वादश्यां मासि चैत्रो तु मां विष्णुं समुपोष्य य:।
पूजयंस्तदवाप्नोति पौण्डरीकस्य यत् फलम्॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य चैत्र मास की द्वादशी तिथि को व्रत रखकर 'विष्णु' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे पुण्डरीक यज्ञ का फल मिलता है।
 
The one who worships me in the name of 'Vishnu' by observing a fast on the twelfth day of Chaitra month, gets the fruits of Pundarika Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)