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mahabharat 14.110.d18: राजन! जो मनुष्य माघकी द्वादशी का व्रत करता है और 'माधव' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे राजसूय यज्ञ का फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d18 
द्वादश्यां माघमासे तु मामुपोष्य तु माधवम्।
पूजयेद् य: समाप्नोति राजसूयफलं नृप॥
 
 
अनुवाद
राजन! जो मनुष्य माघकी द्वादशी का व्रत करता है और 'माधव' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे राजसूय यज्ञ का फल मिलता है।
 
Rajan! One who fasts on Maghaki Dwadashi and worships me in the name 'Madhav', gets the results of Rajsuya Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)