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mahabharat 14.110.d17: जो पौष मास की द्वादशी को व्रत रखता है और 'नारायण' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे वाजिमेध यज्ञ का फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 14.110: सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.110.d17 
द्वादश्यां पुष्यमासे तु नाम्ना नारायणं तु माम्।
उपोष्य पूजयेद् यो मां वाजिमेधफलं लभेत्॥
 
 
अनुवाद
जो पौष मास की द्वादशी को व्रत रखता है और 'नारायण' नाम से मेरी पूजा करता है, उसे वाजिमेध यज्ञ का फल मिलता है।
 
He who fasts on the Dwadashi of the month of Paush and worships me in the name of 'Narayana' gets the fruit of the Vajimedha Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)